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Sunday, January 1, 2012

मां ...ओह मेरी मां,


मां ...ओह मेरी मां,
तुझसे हि तो है ये मेरी खुशियों का ये जमाना,

बचपन मे वो तेरा मेरी अंगुलियों को पकड मुझे चलना सिखाना,
तेरा वो अपनी आंचल मे मुझे दर्द मे भी सुकुन से सुलाना,

तेरी ममता का कोई अंत नहि ये तुमसे दूर होके मैंने जाना,
आज भी याद है मुझे वो बार बार तेरा मुझे अपने सिने से लगाना,

जब दुनिया सोति थि सुनि रातो मे तब तेरा मेरे लिये लोरी सुनाना,
आसमां मे बिजलि कडकते हि वो तेरा मुझे झूले से उठा अपनी गोदि मे झूलाना,

बचपन मे धूप तले वो तेरा मुझे अपने आंचल मे छिपाना,
मुझे अब भी याद है मेरे दर्द से तेरी आंखो मे आंसुओं का आना,

मां ...ओह मेरी मां,
तेरी हि आंचल को मैंने आज तक अपनी पुरी दुनिया जाना.

लेखक : रोशन धर दुबे
लेखन तिथि : 1 जनवरी 2012